सटीक चंद्र नक्षत्र प्रणाली

निःशुल्क वैदिक नक्षत्र कैलकुलेटर एवं जन्म नक्षत्र खोज

हमारे वैदिक कैलकुलेटर से अपना जन्म नक्षत्र, चरण, नक्षत्र स्वामी ग्रह, आराध्य देवता और शुभ नामाक्षर की सटीक गणना प्राप्त करें।

आकाश के 27 दिव्य नक्षत्र

सूर्य राशियां आपके बाहरी व्यक्तित्व को दर्शाती हैं, जबकि 27 नक्षत्र आपकी आत्मा की सूक्ष्म ऊर्जा, मानसिक संस्कारों और पूर्वजन्म के संचित कर्मों को प्रकट करते हैं।

🌙

जन्म नक्षत्र

चंद्रमा का दिव्य निवास

जातक की मूल मानसिक बनावट, भावनात्मक संतुलन और विंशोत्तरी महादशा के प्रारंभिक संतुलन को निर्धारित करता है।

🧭

4 नक्षत्र चरण

सूक्ष्म पुरुषार्थ विभाजन

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष से जुड़ाव। आपके जन्म नक्षत्र के चरण का सीधा संबंध आपकी डी9 नवमांश कुंडली से होता है।

🕉️

नामाक्षर व देवता

मंत्र ध्वनि एवं सुरक्षा

प्रत्येक नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता की पहचान तथा वह पवित्र वैदिक ध्वनि जो आपके जीवन के अवरोधों को दूर करती है।

संपूर्ण 27 नक्षत्रों की प्रामाणिक संदर्भ तालिका

क्र. नक्षत्र नाम राशि विस्तार स्वामी देवता गण शुभ नामाक्षर (चरण 1-4)
1 अश्विनी 0°00' - 13°20' मेष केतु अश्विनी कुमार देव चू, चे, चो, ला
2 भरणी 13°20' - 26°40' मेष शुक्र यमराज मनुष्य ली, लू, ले, लो
3 कृत्तिका 26°40' मेष - 10°00' वृषभ सूर्य अग्नि देव राक्षस अ, ई, उ, ए
4 रोहिणी 10°00' - 23°20' वृषभ चंद्रमा ब्रह्मा जी मनुष्य ओ, वा, वी, वू
5 मृगशिरा 23°20' वृषभ - 6°40' मिथुन मंगल सोम (चंद्र) देव वे, वो, का, की
6 आर्द्रा 6°40' - 20°00' मिथुन राहु रुद्र (शिव) मनुष्य कु, घ, ङ, छ
7 पुनर्वसु 20°00' मिथुन - 3°20' कर्क बृहस्पति अदिति देव के, को, हा, ही
8 पुष्य 3°20' - 16°40' कर्क शनि बृहस्पति देव हू, हे, हो, डा
9 आश्लेषा 16°40' - 30°00' कर्क बुध सर्प (नाग) राक्षस डी, डू, डे, डो
10 मघा 0°00' - 13°20' सिंह केतु पितर राक्षस मा, मी, मू, मे
11 पूर्वा फाल्गुनी 13°20' - 26°40' सिंह शुक्र भग देव मनुष्य मो, टा, टी, टू
12 उत्तरा फाल्गुनी 26°40' सिंह - 10°00' कन्या सूर्य अर्यमा मनुष्य टे, टो, पा, पी
13 हस्त 10°00' - 23°20' कन्या चंद्रमा सविता (सूर्य) देव पू, ष, ण, ठ
14 चित्रा 23°20' कन्या - 6°40' तुला मंगल विश्वकर्मा राक्षस पे, पो, रा, री
15 स्वाति 6°40' - 20°00' तुला राहु वायु देव देव रू, रे, रो, ता
16 विशाखा 20°00' तुला - 3°20' वृश्चिक बृहस्पति इंद्राग्नि राक्षस ती, तू, ते, तो
17 अनुराधा 3°20' - 16°40' वृश्चिक शनि मित्र देव देव ना, नी, नू, ने
18 ज्येष्ठा 16°40' - 30°00' वृश्चिक बुध इंद्र देव राक्षस नो, या, यी, यू
19 मूल 0°00' - 13°20' धनु केतु निरृति राक्षस ये, यो, भा, भी
20 पूर्वाषाढ़ा 13°20' - 26°40' धनु शुक्र आपः (जल देव) मनुष्य भू, धा, फा, ढा
21 उत्तराषाढ़ा 26°40' धनु - 10°00' मकर सूर्य विश्वेदेव मनुष्य भे, भो, जा, जी
22 श्रवण 10°00' - 23°20' मकर चंद्रमा विष्णु भगवान देव खी, खू, खे, खो
23 धनिष्ठा 23°20' मकर - 6°40' कुंभ मंगल अष्ट वसु राक्षस गा, गी, गू, गे
24 शतभिषा 6°40' - 20°00' कुंभ राहु वरुण देव राक्षस गो, सा, सी, सू
25 पूर्वाभाद्रपद 20°00' कुंभ - 3°20' मीन बृहस्पति अज एकपाद मनुष्य से, सो, दा, दी
26 उत्तराभाद्रपद 3°20' - 16°40' मीन शनि अहिर्बुध्न्य मनुष्य दू, थ, झ, ञ
27 रेवती 16°40' - 30°00' मीन बुध पूषा देव देव दे, दो, चा, ची

अपना सही जन्म नक्षत्र और चरण जानें

अपनी जन्मतिथि, जन्म समय और शहर दर्ज करें और सेकंडों में जानें अपनी कुंडली का जन्म नक्षत्र, स्वामी ग्रह और शुभ नामाक्षर।

मेरा जन्म नक्षत्र जानें

वैदिक ज्योतिष में नक्षत्र विज्ञान का महत्व

भारतीय ज्योतिष की प्राचीनतम नींव नक्षत्र मंडल ही है। ऋग्वेद और अथर्ववेद में भी 27 नक्षत्रों का विस्तृत वर्णन मिलता है। चंद्रमा हमारे मन, बुद्धि और संस्कारों का संचालक है। अतः चंद्रमा किस नक्षत्र में स्थित है, यह जानकर किसी भी व्यक्ति के छिपे हुए स्वभाव, जीवन के उद्देश्य और भविष्य की दिशा का अचूक ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।

विंशोत्तरी महादशा और नक्षत्र का संबंध

आपके जीवन की संपूर्ण काल-गणना (महादशा) का निर्धारण जन्म नक्षत्र से ही होता है। उदाहरण के लिए, यदि आपका जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ है तो आपकी पहली महादशा चंद्रमा की होगी; यदि पुष्य नक्षत्र में हुआ है तो पहली महादशा शनि की होगी। नक्षत्र का बचा हुआ अंश ही दशा भुक्त और भोग्य का निर्णय करता है।

विवाह गुण मिलान में नक्षत्र की भूमिका

विवाह के समय 36 गुणों का मिलान (अष्टकूट मिलान) पूरी तरह से वर और वधू के जन्म नक्षत्रों पर ही आधारित होता है। नाड़ी दोष (8 गुण), भकूट दोष (7 गुण) और गण मिलान (6 गुण) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ केवल नक्षत्रों के आपसी संबंधों से ही परखे जाते हैं।